वैकुण्ठ धाम

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गोलोक धाम : परम आनंद और शाश्वत प्रेम की भूमि

  • भगवान श्री कृष्ण का परम अलौकिक और दिव्य धाम
  • “गोलोक” का अर्थ “गौ + लोक” (गायों का लोक) 
  • सत्-चित-आनंदमय, नित्य, अविनाशी लोक
  • सर्वोच्च आध्यात्मिक लोक (भक्ति-रस का केन्द्र)
  • प्राप्ति के साधन – प्रीति-भक्ति, प्रेम-रस
  • कृष्णा से सम्बन्ध -प्रेमी, पुत्र, मित्र, सखा और भगवान
  • प्राकृतिक विशिष्टताएँ – कल्पवृक्ष (इच्छापूर्ति वृक्ष), सुरभि गायें, चिन्तामणि धातु, दिव्य वृन्दावन, अनंत प्रकाश

वैकुण्ठ धाम : भगवान श्री विष्णु का परम धाम

  • भगवान विष्णु का परम अलौकिक और दिव्य धाम
  • वैकुण्ठ = जन्म–मरण के चक्र से मुक्त आध्यात्मिक लोक
  • आध्यात्मिक, दुख-विरहित, मोक्षप्रद
  • स्वर्ग/देवलोक और ब्रह्म लोक से भी परे स्थित आध्यात्मिक लोक
  • प्राप्ति के साधन – भक्ति, श्रद्धा, ज्ञान, वैष्णव साधन
  • नारायण से सम्बन्ध – श्रद्धा-सम्मान, भक्ति-प्रेम आधारित
  • प्राकृतिक विशिष्टताएँ – सोने के महलों और असीम वैभव से सुसज्जित दिव्य धाम।
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

भगवान विष्णु के दशावतार

मत्स्य अवतार

प्रयोजन: जल प्रलय से वेदों और सप्तऋषियों की रक्षा करना।

शिक्षा: जब संसार अज्ञान के जल में डूब रहा हो, तब ईश्वर ही ‘ज्ञान की नौका’ बनकर हमें बचाते हैं।

मत्स्य अवतार

प्रयोजन: जल प्रलय से वेदों और सप्तऋषियों की रक्षा करना।

शिक्षा: जब संसार अज्ञान के जल में डूब रहा हो, तब ईश्वर ही ‘ज्ञान की नौका’ बनकर हमें बचाते हैं।

मत्स्य अवतार

प्रयोजन: जल प्रलय से वेदों और सप्तऋषियों की रक्षा करना।

शिक्षा: जब संसार अज्ञान के जल में डूब रहा हो, तब ईश्वर ही ‘ज्ञान की नौका’ बनकर हमें बचाते हैं।

मत्स्य अवतार

प्रयोजन: जल प्रलय से वेदों और सप्तऋषियों की रक्षा करना।

शिक्षा: जब संसार अज्ञान के जल में डूब रहा हो, तब ईश्वर ही ‘ज्ञान की नौका’ बनकर हमें बचाते हैं।

मत्स्य अवतार

शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा ।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते ॥

तमसो मा ज्योतिर्गमय

मत्स्य अवतार

प्रयोजन: जल प्रलय से वेदों और सप्तऋषियों की रक्षा करना।

शिक्षा: जब संसार अज्ञान के जल में डूब रहा हो, तब ईश्वर ही ‘ज्ञान की नौका’ बनकर हमें बचाते हैं।

मत्स्य अवतार

प्रयोजन: जल प्रलय से वेदों और सप्तऋषियों की रक्षा करना।

शिक्षा: जब संसार अज्ञान के जल में डूब रहा हो, तब ईश्वर ही ‘ज्ञान की नौका’ बनकर हमें बचाते हैं।

मत्स्य अवतार

प्रयोजन: जल प्रलय से वेदों और सप्तऋषियों की रक्षा करना।

शिक्षा: जब संसार अज्ञान के जल में डूब रहा हो, तब ईश्वर ही ‘ज्ञान की नौका’ बनकर हमें बचाते हैं।

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